
उत्सव के रंग
चाहता हूँ
होली खेलने से पहले

नहाकर, सारा मैल धोकर
स्वयं को चमका लूँ
कि हर रंग
बहुत गहरे उतरे
और मन में अंकित कर दे
जीवन का इन्द्रधनुषी पहलू।

चाहता हूँ
होली खेलते वक्त
पहनूँ सफेद कपड़े
कि जन्म हो कैनवास पर
उत्सव की अनूठी कलाकृति का।
चाहता हूँ

होली खेलने के बाद
सँभालकर रखूँ इस कृति को
कि जब भी उदास होऊँ
हर रंग याद दिलाए
कि हम
उत्सव के रंग हैं
तुम्हारे आँसू हमें धुँधला नहीं सकते।
सभी फोटोस मजेदार .... होली की शुभकामनायें
जवाब देंहटाएंअच्छी सकारात्मक सोच भरी रचना. अच्छी लगी.
जवाब देंहटाएंहोली की शुभकामनाए. सुन्दर कविता.
जवाब देंहटाएंउत्सव के हैं रंग निराले।
जवाब देंहटाएंaanand-rup he hai jeevan ke sare rang. bahut kamal kavita
जवाब देंहटाएंkhandit utsav-purush khandelwal ka rangeela phootoo chokkha lagga
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