शुक्रवार, दिसंबर 30, 2011

नये साल की शुभकामनाएँ!

नये साल की शुभकामनाओं के साथ प्रस्तुत है सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की यह कविता -

शुभकामनाएँ / सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

नये साल की शुभकामनाएँ!
खेतों की भेड़ों पर धूल-भरे पाँव को,
कुहरे में लिपटे उस छोटे-से गाँव को,
नए साल की शुभकामनाएँ!

जाते के गीतों को, बैलों की चाल को,
करघे को, कोल्हू को, मछुओं के जाल को,
नए साल की शुभकामनाएँ!

इस पकती रोटी को, बच्चों के शोर को,
चौंके की गुनगुन को, चूल्हे की भोर को,
नए साल की शुभकामनाएँ!

वीराने जंगल को, तारों को, रात को,
ठण्डी दो बन्दूकों में घर की बात को,
नए साल की शुभकामनाएँ!

इस चलती आँधी में हर बिखरे बाल को,
सिगरेट की लाशों पर फूलों-से ख्याल को,
नए साल की शुभकामनाएँ!

कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को,
हर नन्ही याद को, हर छोटी भूल को,
नये साल की शुभकामनाएँ!

उनको जिनने चुन-चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे,
उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे,
नये साल की शुभकामनाएँ!

1 टिप्पणी:

  1. vaah !! बहुत सुन्दर कविता, बहुत सुन्दर ग्रीटिंग कार्ड. सर्वेश्वर की बात ही अलग है. शेयर कर रहा हूँ भाई.

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